क्या आप जानते है मृत्यु कैसे होती है?

क्या आप जानते है मृत्यु कैसे होती है? डॉक्टर किसी की सास की जांच करते हैं तो उन्हें मृत घोषित कर सकते हैं लेकिन वे अभी भी संवेदनाएं महसूस कर सकते हैं। चीन में उड़ान की पूरी पद्धति है । हम भी थोड़ा बहुत यहां वहाँ उड़ सकते हैं इसे सक्रिय बनाने के लिए योगाभ्यास है। अगर आपका व्यान वायू काम होने लगेगा तो आपका शरीर धीरेधीरे सड़ने लगेगा और कुछ सांप के विष में ऐसी ताकत है जिससे आपके शरीरका व्यान घटता हैं | यही कारण है कि हमारी संस्कृति में 14 दिनों तक चलने वाली रस्में है ।

मृत्यु के बाद भी क्यों अति हैं दाढ़ी ?


डॉक्टर जीवन के बारे में यह कहते हैं कि हमारे शरीर में एक खरब कोशिकाएं हैं और इनमें से प्रत्येक कोशिका अपने आप में जीवित है| डॉक्टर कह रहे हैं कि मस्तिष्क 10 घंटे तक जीवित रहता है जब कोई मर चुका है लेकिन मस्तिष्क जीवित है उसकी त्वचा उसकी मांसपेशियां उसकी हड्डियां कई घंटों तक जीवित रहती हैं कहते हैं लेकिन जब हम कहते है कि वह मर चुका है लेकिन उसके शरीर का एक बड़ा हिस्सा अभी भी जीवित होता है और ये कोशिकाएं मरीज के मर जाने के बाद भी अगर आप कोशिकाओं को लेते हैं तो वह सक्रिय रहती है। जब हम अभी दाढ़ी कर ते हे है मरने के बाद भी हमारी बॉडी को दाढ़ी करना पड़ेगा।

आपको पता है जब कोई मर चुका है तब भी कुछ कोशिकाएं सक्रिय क्यों रहते हैं?

यह दर्ज किया गया है कि 10 घंटे तक बहुत सारी गतिविधियां होती हैं और असल में मस्तिष्क एक खास तरह की गतिविधि में चला जाता है। आखिर के कुछ बहुत ही चौंकाने वाले तत्वों को पैदा करता है। ऐसा इसलिए जिसे हम शारीरिक स्तर पर जीवन कह रहे हैं वह कहीं अलग स्तरों पर एक प्रणाली है। इसमें हार्डवेयर है और इसमें सॉफ्टवेयर भी हैं तो हार्डवेयर के केंद्र में हड्डियों हैं। लेकिन सॉफ्टवेयर भी उतना ही महत्वपूर्ण है वरना एक कोशिका को कैसे पता चलेगा कि यह एक मानव कोशिका है कि यह सूअर की कोशिका? या पेड़ की कोशिका? या कुछ और नहीं है। इसे कैसे पता चलता है? क्योंकि यह पूरा सॉफ्टवेयर मौजूद है।

विकास मूलक याददाश्त,अनुवांशिक याददाश्त कार्मिक याददाश्त सिस्टम में हर कोशिका में विभिन्न प्रकार की गई है। ताकि कभी भ्रमित ना हो अगर आप तीन दिनों तो कुत्ते का भोजन खाते हैं तो आप कुत्ता नहीं बनेंगे। है ना? क्योंकि इसमें स्मृति बनी हुई है जो सॉफ्टवेयर हैं। सॉफ्टवेयर पैकेज में हार्डवेयर से बड़ा है बहुत बड़ा और यह उस ऊर्जा से संचालित है जिसे हम जीवन शक्ति के रूप में मान रहे है।

शरीर में ५ प्राण का क्या काम हैं?

क्या आप जानते है मृत्यु कैसे होती है? योग में हम इसे प्राण कहते हैं यह 5 बुनियादी आयामों में खुद को अभिव्यक्त करता है। इसके दूसरे रूप हैं जो बहुत जटिल है। मुख्य पांच मूल रूप प्राण वायु, समान वायु, अपान वायु, उदान वायु और व्यान इनके अलग-अलग कार्य हैं।

प्राण का संबंध सांस श्वसन क्रिया और विचार प्रक्रिया से है। अगर प्राणवायु क्षीण हो जाती तो आपकी श्वसन क्रिया चली जाएगी तो तुरंत डॉक्टर जांच करते हैं और कहते हैं कि ये मर चुका है। उनकी छाती को पंप करने की कोशिश करेंगे अगर सांस वापस नहीं आई तो वह मर चुका है। श्वसन प्रक्रिया और आपके फेफड़ों का काम सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं एक बार शासन बंद हो जाता है तो वह प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से खत्म हो जाएगी। तो प्राण वायु जा चुकी है।
ऐसा नहीं है कि यह सब वायू एक के बाद एक जाएंगे वह एक ही समय में जाएंगे। लेकिन एक के जाने का मतलब है कि यह मृत हो गया है

अगर समान वायु हो चली जाती है यह शरीर में गर्मी पैदा करने का कार्य करती है। तो एक बार जब सामान वायु हल्की पड़ने लगती है तो शरीर ठंडा होने लगता है और यह अकड़ने भी लगता है

एक बार जब अपान वायु एक बड़े स्तर पर घटने लगती है तो इसका संवेदी पहलू हमें समझना चाहिए आप किसी की सांस की जांच करके उन्हें मृत घोषित कर सकते हैं लेकिन मैं अभी भी संवेदना को महसूस कर सकते हैं ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां लोग घबरा गए हैं क्योंकि एक मृत शरीर में थोड़ी हरकत हुई थी ऐसा बार बार कई बार हुआ है जब किसी को मेडिकल दृष्टि से मृत घोषित कर दिया गया था लेकिन शरीर में हलचल हुई जो बहुत हल्के तरीके से होती है। क्योंकि संवेदी गतिविधि अभी भी जारी है शरीर को अभी भी यकीन नहीं है यह खत्म हो गया या अभी भी अपनी ओर से एक कोशिश कर रहा है।

जो उदानवायु चली जाती है तब शरीर का हल्का पन भी चला जाता है। मान लीजिए आप अभी बहुत खुश और जीवंत है आपको खुद पर 50 किलोग्राम का वजन महसूस नहीं होता है। लेकिन वजन मौजूद है अगर आप weight मशीन पर खड़े हैं लेकिन जब चलते हैं तो यह महसूस नहीं होता। क्योंकि उदानवायु उछाल पैदा करता है इससे आपको गुरुत्वाकर्षण का बल कम मासूस होता होता है इसे सक्रिय करने के लिए योगाभ्यास है। चीन में उड़ान की पूरी पध्दति है। आपने हॉलीवुड फिल्में देखी होंगी वह पे थोड़ा बढ़ा चढ़ाकर होता है लेकिन शरीर ज्यादा हल्का और उछाल वाला बन जाता है। एक मार्शल आर्ट फाइटर के लिए उछाल का हों बहुत महत्वपूर्ण है।

मृत्यु के बाद शरीर भारि क्यों लगता हैं?


ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां कुछ बैली डांसर और मार्शल आर्ट एक्सपोर्ट्स ने वह कर दिखाया है जो शारीरिक रूप से संभव नहीं लगता था। वे उतनी ऊंचाई तक उछाले जिसे सभी भौतिक वैज्ञानिकों ने बिल्कुल असंभव माना लेकिन सिर्फ ज्यादा उछाल पैदा करके वह स्तर से आगे निकल गए तो उदानवायु उछाल को तय करता है एक बार जब उदानवायु कम होना शुरू होता है अचानक शरीर भारी हो जाता वजन हमेशा वही रहता है लेकिन अब आप ज्यादा वजन महसूस करते हैं क्योंकि उडानवायु चला गया है। जो लोग अस्पताल में काम करते हैं वह जानते होंगे एक जीवित व्यक्ति को और एक मृत व्यक्ति को उठाकर ले जाना इस में बड़ा अंतर होता है सिर्फ इसलिए क्योंकि उदानवायु चला गया है अब कोई उछाल नहीं है।

व्यान की प्रकृति संरक्षण की है जब व्यान घटने लगता है तो आप के जीवित होने के बावजूद शरीर सड़ना शुरू हो जाएगा। कुछ खास तरह के सांप के जहर है जो ऐसा कर सकते हैं अगर वह आपको काटते हैं तो आप मरेंगे नहीं लेकिन शरीर के अंग वास्तव में अलग होकर गिरने लगेंगे क्योंकि व्यान घाट रहा है और अंग अलग होने लगेंगे तो जैसे ही व्यान कम होता है सड़ने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

हमारी संस्कृति में 14 दिनों तक चलने वाले अनुष्ठान क्यों हैं?


योग में ऐसी पद्धतियां है जहाँ हम चाहते हैं कि सभी वायु लगभग एक साथ ही निकले यह सभी 1 घंटे के भीतर ही चले जाए। सामान्य मृत्यु की स्थिति में ये उस व्यक्ति की उम्र पर निर्भर करता है कि कोई शरीर कितना जीवित है उस आधार पर इसमें लंबा समय लग सकता है। इसमें 14 घंटे तक लग सकते है व्यानवायु को शरीर छोड़ने में 14 दिन तक लग सकते हैं यही कारण है कि हमारी संस्कृति में 14 दिनों तक चलने वाले अनुष्ठान हैं। क्योंकि व्यानवायु अभी भी मौजूद हो सकता है क्योंकि जब आप किसी व्यक्ति को दफनाते हैं तो अभी भी व्यानवायु वह हो सकता है वो भी 14 दिन तक।

यही कारण है कि अगर कोई मृत हो जाता है तो हमारी संस्कृति में ऐसा नियम था कि 1 घंटे के भीतर उसका अंतिम संस्कार देना चाहिए। डॉक्टर मरा हुआ डायग्नोज नहीं करते उन्हें मरा हुआ घोषित करते हैं इसमें अंतर है तो जब डॉक्टर किसी को मृत घोषित करते हैं तो वो हमारे लिए वो मर चुके होते है। लेकिन जहां तक उस व्यक्ति का सवाल है एक तरह वह शरीर से निकल गया है उसने अपना शरीर खो दिया है।

मौत के बाद तुरंत उसका अंतिम संस्कार क्यों कर देना चाहिए?

जीवन भर कोई यही सोचता रहा कि वह एक शरीर है। उसे कभी एहसास नहीं हुआ कि हम जो भौतिक पदार्थ होते हैं वह इस धरती से इकट्ठा किया हुआ है उसने कभी इसका एहसास नहीं किया जब वह अचानक शरीर से बाहर खिसक जाता है तो वह शरीर के आसपास मंडराता है। क्योंकि उसने अपनी बुद्धिमता को खो दिए हैं एक बार जब आप शरीर छोड़ देते हैं तो बुद्धि मौजूद नहीं होती तो वह शरीर के आसपास मंडराता है। जिस क्षण हम निश्चित हैं कि कोई व्यक्ति पक्के तौर पर मर चुका है। तो हमें तुरंत उसका अंतिम संस्कार कर देना चाहिए क्योंकि यह उस मृत व्यक्ति के लिए अच्छा है। ताकि उसे पता चल जाए कि खेल खत्म हो गया है और यह जीवित लोगों के लिए भी अच्छा है

आपने देखा होगा कि अगर कोई व्यक्ति जो आपको बहुत प्रिय है मर जाता है और उसका शरीर यहां पड़ा है तो आपको मतिभ्रम होता रहता है। हो सकता है कि वह बस सो रहे हो हो सकता है कि वह उठ बैठे और हो सकता है कि कोई चमत्कार हो जाए शायद कुछ और हो जाए यह आवश्यक रूप से चलता रहेगा। आप देखेंगे कि लोग रो रहे हैं और बड़ा भावनात्मक नाटक हो रहा है लेकिन जिस पल आप उनका अंतिम संस्कार करते हैं तो आप देखेंगे कि हर कोई शांत हो जाएगा। क्या आपने इस पर गौर किया है? हमेशा क्योंकि अब हर कोई जानता है कि खेल खत्म हो चुका है। तो जीवन के द्वारा इस शरीर को छोड़ना ये बहुत उलजा हुआ है। यह कोई बुलबुला नहीं है जो फुट कर ऐसेही चला जाएगा यह चरणबद्ध तरीके से निकलता है क्योंकि यह चरणबद्ध तरीके से अंदर आया है और यह चरणबद्ध तरीके से ही जाएगा।

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