प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत (Mystery of ancient history of India in Hindi)

प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत(ancient history of India in Hindi) भारत में आधुनिक मनुष्य यानी होमोसेपियंस आज से लगभग 65000 साल पहले अफ्रीका से आए थे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि होमसेफियन्स ही वो प्राचीन मानव जाति है जिससे आज की आधुनिक मनुष्य विकसित हुए हैं।अगर हम इतिहास की और ज्यादा गहराई में जाए तो भारत के अंदर इंसानों के होने के निशान लगभग 20 लाख साल तक पुराने मिल चुके हैं। 

20 लाख साल पहले जो मनुष्य भारत में रहते थे वह कई वर्षों पुर्व प्राचीन दुनिया से पूरी तरह कुछ कहते विलुप्त हो चुके थे। इन प्राचीन मानव को आज होमो इरेक्टस के नाम से जाना जाता है। आमतौर पर यह कहा जाता है कि होमो इरेक्टस दुनिया में सबसे पहिले अफ्रीका में विकसित हुए थे। और फिर वहां से पलायन करके वह दुनिया के दूसरे देशों जैसे भारत, श्रीलंका, चीन और इंडोनेशिया आदि में फ़ैल गये। 

भारतीय मध्य पाषाण काल की मुख्य विशेषता क्या है?

20 से 25 लाख साल पहले paleolithic period यानी पुरापाषाण काल के दौरान भारत के अंदर होमोइरेक्टस हीरा करते थे। क्योंकि खोज कर्ताओं को भारत के तमिलनाडु, कर्नाटक और उड़ीसा जैसे कई जगहों पर पुरापाषाण काल के अवशेष मिल चुके हैं। यह pre historic (लिखित इतिहास का पहिले का समय) का वह समय था जब इंसानों ने पहली बार आग जलाना और पत्थरों से हथियार बनाना सीखा था। 

पुरापाषाण काल के बाद 10000 से 8000 BC के बीच का समय  Mesolithic period यानी मध्य पाषाण काल कहलाता है।यह वह काल था इसमें इंसानों ने जानवरों को पालना और खेती करना शुरू किया था। इस काल से जुड़े बहुत से अवशेष हमारे भारत के मैसूर और गुजरात के अंदर खोजे जा चुके हैं। इसके बाद 8000 से 4000 BC के बीच का समय Neolithic Period यानी नवपाषाण काल के नाम से जाना जाता है। इस युग में हम इंसानों ने खेती करने के साथ ही पहली बार पहिये का इस्तेमाल करना भी सीखा था। 

 इसके बाद 4000 से 1500 BC के बीच का समय Chalcolithic Period यानी ताम्र पाषाण काल के नाम से जाना जाता है। इस युग में इंसानों ने पत्थरों के साथ ही तांबे का हथियार बनाना शुरू कर दिया था। साथ ही अगर भारतीय इतिहास की नजर से देखें तो यह भारत के लिए सबसे ज्यादा खास माना जाता है। क्योंकि यही वह युग था जिसके दौरान भारत मे indus valley civilization यानी सिंधु घाटी सभ्यता रहा करती थी। और आज भारत के प्राचीन इतिहास की शुरुआत भी इस सभ्यता के बनने के समय से ही मानी जाती है। 

सिंधु घाटी सभ्यता की खोज कब हुई?

इतिहासकार और खोजकर्ता यह बताते हैं कि इस सभ्यता की शुरुआत 2500 BC के आसपास भारत के पश्चिमी हिस्से में हुई थी। भारत का वह हिस्सा आज पाकिस्तान के रूप में एक अलग देश बन चुका है। सिंधु घाटी सभ्यता अपने समय में दुनिया के सबसे एडवांस और सबसे बड़ी सभ्यताओं में से एक थी। हैरानी की बात यह है कि साल 1920 से पहले हम लोग इस सभ्यता के बारे में कुछ नहीं जानते थे।

प्राचीन भारतीय इतिहास में हड़प्पा सभ्यता।

पुरातत्व विभाग (Archaeological Department)  की एक खुदाई के दौरान जब इस सभ्यता के दो प्राचीन शहर मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के अवशेष निकल कर सामने आए तब जाकर हमें इसके बारे में पता चला। इस खुदाई घरों के टूटे हुए हिस्से, युद्ध मे इस्तेमाल होने वाले हथियार, सोने और चांदी के आभूषण, मुहरे और बच्चों के खिलौने जैसी और भी बहुत सी चीजें मिली थी।  5000 साल पहले भारत के अंदर यह एक ऐसी सभ्यता थी जो अपने समय के हिसाब से काफी ज्यादा एडवांस थी। सिंधु घाटी एक शहरी सभ्यता थी जिसके अंदर मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के साथ ही लोथल, कालीबंगा, बनवाली  और आलमगीरपुर जैसे कुल 10 शहर हुआ करते थे। 

इन सभी शहरों में सबसे बड़े और मुख्य शहर मोहनजोदड़ो और हड़प्पा को माने जाते थे। क्योंकि उस समय सिंधु घाटी सभ्यता के अंदर व्यापार का मुख्य केंद्र हुआ करता था।  खुदाई में इन दोनों शहरों के जो खंडहर खोज कर्ताओं को मिले हैं उनकी जांच करने पर ही पता चलता है कि यह दोनों शहर बेहतरीन इंजीनियरिंग की मदद से बहुत ही अच्छी तरह प्लान करके बसाये गए थे।  साथ ही इन शहरों की देखभाल और रखरखाव का काम भी काफी अच्छे ढंग से किया जाता था। इन शहरों में लोगों के लिए एक चौड़ी सड़कें और साफ सफाई के लिए एक अच्छा सीवर सिस्टम बनाया गया था। इसके अलावा यहां पर लोगों के लिए पक्के मकान बनाए गए थे जो दो मंजिले होते थे।

कैसे ख़त्म  हुई  सिंधु  घाटी सभ्यता।

 हड़प्पा के लोग अनाज उगाना बहुत अच्छी तरह जानते थे और इन चीजों को उगाकर वह अपने लिए भोजन जमा करते थे। खुदाई में मिली कुछ सबूत इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि वे लोग सूती और उनी कपड़े पहना करते थे। बताया जाता है कि 1900 से 1500 BC साल के बीच इस सभ्यता का अंत हो गया था। इसके अंत होने के कारणों पर बहुत से जानकर एक दूसरे से सहमत नहीं होते हैं। अलग-अलग जानकर इस सभ्यता के विलुप्त होने की अलग-अलग कारण बताते हैं।  इसमें भूकंप,बाढ़, युद्ध, आक्रमण और महामारी जैसी घटना शामिल है। 

 प्राचीन भारतीय इतिहास में वैदिक सभ्यता कब शुरू हुई। 

भारत में सिंधु घाटी सभ्यता के बाद एक नई सभ्यता का विकास हुआ उसको आज हम वैदिक सभ्यता के नाम से जानते हैं। इस सभ्यता का नाम वैदिक इसलिए रखा गया क्योंकि इस समय की मुख्य जानकारी हमें वेदों से प्राप्त होती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्राचीन भारत में लिखे गए हिंदू धर्म के बुनियादी धर्म ग्रंथ माने जाते हैं।  2020 से 1500 BC के बीच आर्य मध्य एशिया से भारत के अंदर आए थे। उनकी भाषा संस्कृत हुआ करती थी और उन्होंने ही भारत में वैदिक सभ्यता की शुरुआत की थी। ये सभ्यता सरस्वती नदी के किनारे के क्षेत्र में विकसित हुई थी। जिनमें भारत के पंजाब और हरियाणा राज्य आते हैं। आज इस वैदिक काल को दो अलग-अलग हिस्सों में बांट कर देखा जाता है। 

इसका पहला हिस्सा पर्व वैदिक काल कहा है जिसकी अवधि 1500 – 1000 BC मानी जाती है और दूसरे हिस्से को उत्तर वैदिक काल कहते हैं जो 1000- 600 BC रहा था। कहा जाता है कि आर्यों ने ही सबसे पहले लोहे की खोज की थी। इस सभ्यता में व्यापार के लिए बार्टर सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता था।  यानी अगर किसी व्यक्ति को कोई चीज खरीदनी होती थी उसके बदले में दुकानदार को अपनी कोई चीज देता था। इसी तरह एक दूसरे के साथ चीजें बदल कर व्यापार किया करते थे।  

प्राचीन भारतीय इतिहास जैन और बौद्ध धर्म का  प्रसार। 

 भारत के अंदर जैन और बौद्ध धर्म का प्रसार वैदिक सभ्यता के दौरान ही शुरू हो गया था। जैन धर्म के प्रसार की शुरुआत करने का श्रेय भगवान पार्श्वनाथ हो जाता है जो जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर माने जाते हैं। भगवान पार्श्वनाथ का जन्म 872 bc में वाराणसी के अंदर हुआ था और वह पूरे 100 साल तक जीवित रहे। इसके बाद 772 bc में पारसनाथ पर्वत के शिखर पर उन्होंने मोक्ष की प्राप्ति की।

भगवान महावीर और  जैन धर्म 

भगवान पार्श्वनाथ के बाद भगवान महावीर का जन्म हुआ।  जो जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर माने जाते हैं।  भगवान महावीर का जन्म आज से करीब ढाई हजार  साल पहले 599 BC में कुंडल ग्राम नाम की एक जगह पर हुआ था। 30 साल की उम्र में भगवान महावीर ने राजपाट त्याग कर सन्यास धारण कर लिया था और 12 साल तपस्या करने के बाद उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हो गई थी। कई साल तक लगातार जैन धर्म का प्रचार करने की प्राप्ति हुई कई साल तक लगातार जैन धर्म का प्रसार करने के बाद सन 527 BC में पावापुरी नाम की एक जगह पर उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई।

गौतम बुद्ध और बौद्ध धर्म। 

 इसी समय  गौतम बुद्ध का जन्म सन 563 BC में नेपाल के अंदर लुंबिनी नाम की जगह पर हुआ था। उनके पिता का नाम शुद्धोधन था जो साक्ष्य के राजा थे और उनकी माता का नाम महामाया था जिनकी मृत्यु उनके जन्म के 7 दिन बाद ही हो गई थी। यही वजह थी कि गौतम बुध का पालन पोषण उनकी मां की छोटी बहन महा प्रजापति गौतमी  ने किया था।  वह 29 साल की उम्र में अपने नवजात बेटे राहुल, पत्नी यशोधरा और अपनी राजपाट को ज्ञान की खोज में चले गए थे। और कई साल कठोर तपस्या करने के बाद आखिरकार उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वह गौतम बुद्ध से भगवान बन गए। आज दुनिया भर में फैला हुआ बौद्ध धर्म की शिक्षाओं पर आधारित है।

 बौद्ध धर्म का प्रसार करने के बाद सं 483 BC में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में उनका निधन हो गया। भारत के अंदर 600 बीसी के आस-पास बड़े-बड़े साम्राज्य बनने और शहरीकरण की शुरुआत हो गई थी।  और यह बदलाव  धीरे-धीरे लोगों के अंदर से वैदिक रूढ़िवादी विचारधारा को खत्म कर रहा था। साथ ही भारत में बौद्ध और जैन धर्म के कारण शुरू हुआ श्रवण आंदोलन भी वैदिक संस्कृति के लिए काफी नुकसानदेह साबित हुआ। और इन सब का नतीजा यह हुआ कि 500 BC तक आते-आते वैदिक सभ्यता का अंत हो गया।

प्राचीन भारतीय इतिहास महाजनपद  की  शुरुआत।

 इस सभ्यता के बाद भारत में महाजनपद का दौर शुरू हुआ। जो 520 से 345 BC  तक रहा था। बताया जाता है कि इस दौरान भारत में 16 अलग-अलग साम्राज्य हुआ करते थे और इन सभी साम्राज्य को एकत्रित रूप से महाजनपद कहा जाता था। महाजनपद को भारत के प्राचीन इतिहास में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है  क्योंकि सिंधु घाटी सभ्यता के खत्म होने के बाद पहली बार महाजनपद के अंदर ही बड़े बड़े शहरों और नगरों का निर्माण शुरू हुआ था। भारत के महाजनपद में मौजूद ये साम्राज्य उत्तरी अफगानिस्तान से बिहार और हिंदू कुश  से गोदावरी नदी तक फैले हुए थे। बताया जाता है कि इन सभी 16 साम्राज्य में मगध साम्राज्य सबसे ज्यादा शक्तिशाली हुआ करता था। 

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